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साइबर ठगी का बड़ा खुलासा: पुलिस ने संगठित गिरोह के 5 शातिर अभियुक्त किए गिरफ्तार

 

ब्यूरो चीफ प्रमोद मिश्रा, बलरामपुर ✍️

बलरामपुर। जनपद में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने संगठित तरीके से साइबर ठगी करने वाले गिरोह के 5 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर, अपर पुलिस अधीक्षक एवं साइबर क्राइम नोडल अधिकारी विशाल पाण्डेय तथा क्षेत्राधिकारी तुलसीपुर/अपराध डॉ. जितेन्द्र कुमार के पर्यवेक्षण में साइबर थाना प्रभारी आर.पी. यादव के नेतृत्व में की गई।

पुलिस के अनुसार, अभियुक्तों के खिलाफ मु0अ0सं0 05/2026 के तहत धारा 318(4), 319(2), 336(3), 338 बीएनएस एवं 66D आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि यह गिरोह संगठित नेटवर्क के जरिए साइबर ठगी को अंजाम देता था।

गिरफ्तार अभियुक्तों के नाम:

  1. मो. अकरम खान
  2. बच्चा लाल उर्फ प्रशांत उर्फ गोलू
  3. आशिफ
  4. प्रतीक मिश्रा
  5. सुजीत सिंह

इनमें से मो. अकरम खान को सुआव नाला के पास से तथा अन्य चार अभियुक्तों को श्याम बिहार कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया।

ठगी का तरीका: पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि अभियुक्त लोग लालच देकर व्यक्तियों के बैंक खाते और उनसे जुड़े मोबाइल सिम किराये पर लेते थे। इसके बदले खाता धारकों को 15 से 20 हजार रुपये तक दिए जाते थे, जबकि एजेंटों को लगभग 5 हजार रुपये मिलते थे।
इसके बाद फर्जी पहचान के जरिए अतिरिक्त खाते व सिम तैयार कर साइबर ठगी की रकम को इन खातों में ट्रांसफर किया जाता था। गिरोह द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से आपसी समन्वय किया जाता था और बैंक पासबुक, एटीएम व सिम कार्ड को मिठाई के डिब्बों में छिपाकर कोरियर के जरिए भेजा जाता था।

बरामदगी व आंकड़े: पुलिस को अब तक 17 बैंक खाते मिले हैं, जिनका उपयोग साइबर ठगी में किया जा रहा था। देशभर में इन खातों से जुड़ी 14 ऑनलाइन शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें कुल ठगी की राशि लगभग 58 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
अब तक 8 बैंक खातों का विवरण प्राप्त हुआ है, जिनमें करीब 5.06 करोड़ रुपये का लेन-देन सामने आया है। शेष खातों की जांच जारी है।

आपराधिक इतिहास: गिरफ्तार अभियुक्त आशिफ के खिलाफ पूर्व में भी गोरखपुर जनपद में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

पुलिस ने सभी अभियुक्तों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है और मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है। साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

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