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गर्रा व खन्नौत नदियों की बाढ़ समस्या के स्थायी समाधान को लेकर प्रशासन सक्रिय, हाइड्रोडायनामिक प्रवाह मॉडलिंग से होगा अध्ययन

 

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव, उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहाँपुर। जनपद के शहरी क्षेत्र में गर्रा एवं खन्नौत नदियों से आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय में राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH) रुड़की के वैज्ञानिकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में NIH रुड़की से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एल.एन. ठकुराल और डॉ. पी.सी. नायक ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि शहरी क्षेत्र में हाइड्रोडायनामिक प्रवाह मॉडलिंग के माध्यम से नदियों के जल स्तर, प्रवाह की गति और जलभराव वाले क्षेत्रों का सटीक मानचित्रण किया जाएगा। उन्होंने हरिद्वार में किए गए सफल अध्ययन का उदाहरण देते हुए बताया कि वैज्ञानिक मॉडलिंग के माध्यम से बाढ़ प्रबंधन में महत्वपूर्ण सुधार संभव है। इसी तर्ज पर शाहजहाँपुर की बाढ़ समस्या का भी विश्लेषण कर समाधान तैयार किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में आई बाढ़ के कारणों पर विशेष रूप से अध्ययन किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2024 से पहले स्थिति सामान्य थी, लेकिन उसके बाद बाढ़ के पैटर्न में जो बदलाव आए हैं उनका गहन विश्लेषण किया जाना आवश्यक है।

जिलाधिकारी ने वैज्ञानिकों और संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि अध्ययन का दायरा केवल शहर तक सीमित न रखते हुए जनपद पीलीभीत के दियूनी डैम से लेकर शाहजहाँपुर के अंतिम छोर तक रखा जाए, ताकि पानी के डिस्चार्ज और बहाव मार्ग का सटीक आकलन किया जा सके। साथ ही यह भी जांच की जाए कि नदियों में चैनल इक्विपमेंट लगाने या ड्रेजिंग (नदी की सफाई और खुदाई) की आवश्यकता है या नहीं।

बैठक में विभागीय समन्वय पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग को निर्देशित किया कि हाइड्रोडायनामिक मॉडलिंग के लिए आवश्यक सभी तकनीकी आंकड़े वैज्ञानिकों को शीघ्र उपलब्ध कराए जाएं। नगर निगम को काशीराम कॉलोनी और मनफूल कॉलोनी के नालों पर बाढ़ से पहले स्लूइस गेट लगाने के निर्देश दिए गए, ताकि नदी का बढ़ा हुआ पानी बस्तियों में वापस न जा सके। वहीं शाहजहाँपुर विकास प्राधिकरण को पुराने मास्टर प्लान का अध्ययन कर शहरी ड्रेनेज और निर्माण कार्यों के बीच समन्वय स्थापित करने को कहा गया।

राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के वैज्ञानिकों की टीम 06 से 07 मार्च तक जनपद के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दो दिवसीय स्थलीय निरीक्षण भी करेगी। इस दौरान टीम नदियों के तटबंधों, शहरी ड्रेनेज आउटलेट्स और संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण कर आवश्यक आंकड़े एकत्रित करेगी।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, नगर आयुक्त, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व), बरेली से आए वरिष्ठ हाइड्रोलॉजिस्ट, NIH रुड़की के वैज्ञानिक तथा सिंचाई और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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