👩🏫 जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का कुशल मार्गदर्शन
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) दिव्या गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में पूरे सात दिनों के रचनात्मक शेड्यूल को तैयार किया गया था। इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें भाषाई जुड़ाव को जनपद की स्थानीय भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और देशभक्ति की साझी विरासत से जोड़कर बेहद अनूठे ढंग से क्रियान्वित किया गया, जिससे छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान से इतर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
• प्रथम दिवस (बुनियादी अभिवादन एवं अक्षरज्ञान): बच्चों को स्थानीय बोली के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं जैसे उर्दू, पंजाबी, बांग्ला, संस्कृत और गुजराती के बुनियादी शब्दों, अभिवादन व गिनती का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही बच्चों को इंडियन साइन लैंग्वेज (Indian Sign Language) के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
• द्वितीय दिवस (वर्चुअल सिटी टूर व संवाद): तकनीक का बेहतरीन उपयोग करते हुए स्मार्ट पैनल के माध्यम से बच्चों को गूगल वर्चुअल टूर कराया गया। बच्चों ने घर बैठे देश के अन्य राज्यों के प्रमुख शहरों और विशेष रूप से सांस्कृतिक नगरी वाराणसी को डिजिटल माध्यम से एक्सप्लोर किया।
• तृतीय दिवस (कला, संगीत एवं नृत्य): विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं, गीतों और समृद्ध संस्कृतियों को एक-दूसरे के साथ साझा किया गया। इस दौरान बच्चों ने मनमोहक एकल और सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किए।
• चतुर्थ दिवस (स्वाद का संगम / स्थानीय व्यंजन): बच्चों और शिक्षकों ने एक साथ मिलकर विद्यालय परिसरों में सत्तू, लस्सी, खिचड़ी और पारंपरिक चोखा-बाटी जैसे स्थानीय व्यंजन बनाए। विशेष रूप से प्राथमिक विद्यालय बुझिया (विकास क्षेत्र- पुवायाँ) में एक रेस्टोरेंट का डमी सेट लगाकर बच्चों को व्यावसायिक शब्दावली और वार्तालाप का व्यावहारिक पाठ पढ़ाया गया।
• पंचम दिवस (माटी के लाल / स्थानीय नायकों को नमन): शाहजहाँपुर की वीर भूमि के अमर सपूतों—स्वतंत्रता सेनानी पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्लाह खान, मौलवी अहमद उल्लाह शाह, स्काउट एवं गाइड के प्रणेता श्रीराम बाजपेई, परमवीर चक्र विजेता नायक जादुनाथ सिंह, कैप्टन कन्हैया लाल शुक्ल, कारगिल शहीद रमेश कुमार तथा कश्मीर में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद सारज सिंह की वीरगाथाओं से बच्चों को रूबरू कराकर उनमें राष्ट्रभक्ति का संचार किया गया।
• षष्ठम एवं अंतिम दिवस (भूगोल की समझ व समापन): बच्चों को जनपद की नदियों, पर्वतों, जंगलों और स्थानीय भौगोलिक स्थिति का परिचय कराया गया। शिविर के अंतिम दिन छात्र-छात्राओं ने अपने अभिभावकों के समक्ष मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिसके बाद समर कैंप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
🏫 इन प्रमुख विद्यालयों के नवाचारों को मिली उच्च सराहना:
जनपद स्तर पर चलाए गए इस महा-अभियान के दौरान प्राथमिक विद्यालय बुझिया (पुवायाँ), प्राथमिक विद्यालय अजीजगंज (ददरौल), संविलयन विद्यालय दौलतपुर (भावलखेड़ा) तथा जलालाबाद क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय मुड़िया कलां एवं मगटोरा में आयोजित की गईं नवोन्मेषी गतिविधियों और उत्कृष्ट प्रस्तुतियों की शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों व प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा जमकर सराहना की गई।
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🌟 निखर रहा है बचपन, संवर रहा है सरकारी स्कूल — बहुभाषी ज्ञान और संस्कृति के गौरव के साथ आगे बढ़ रहे उत्तर प्रदेश के नौनिहाल।
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