शाहजहाँपुर में भ्रष्टाचार और भूमाफियाओं का सिंडिकेट इस कदर हावी हो चुका है कि यहाँ जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक आलाधिकारियों के आदेश भी फाइलों में दफन होकर रह गए हैं। जनपद के मोहल्ला बिजलीपुरा निवासी एक पीड़ित अपनी ही पैतृक जमीन वापस पाने के लिए आज भी प्रशासनिक चौखटों पर सिर पटकने को मजबूर है। यह पूरा मामला तहसील सदर के अंतर्गत आने वाले ग्राम रसूलपुर जहांनगंज की करोड़ों की कीमती जमीन से जुड़ा है, जिस पर कथित भूमाफियाओं ने राजस्व कर्मियों से सांठगांठ कर फर्जीवाड़े का एक बड़ा जाल बुना है।
पीड़ित राकेश कुमार पुत्र छोटेलाल के अनुसार, ग्राम रसूलपुर जहांनगंज स्थित गाटा संख्या 151/296 की भूमि पर भूमाफियाओं की नजर थी। आरोप है कि बिजलीपुरा निवासी सीवा खान पत्नी वसीम खान ने क्षेत्र के नामजद दबंगों कमलेश सक्सेना व महेश सक्सेना तथा तत्कालीन कानूनगो व लेखपाल से गहरी सांठगांठ की। इन सबने मिलकर एसडीएम (SDM) कोर्ट का एक हूबहू फर्जी और जाली आदेश तैयार कराया और उसके बूते सरकारी कंप्यूटर फीडिंग प्रणाली में हेरफेर करते हुए खसरा-खतौनी में अवैध रूप से अपना नाम दर्ज करा लिया।
जब पीड़ित राकेश कुमार ने इस अवैध कब्जे के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी और न्यायालय की शरण ली, तब जांच के दौरान यह पूरा महा-फर्जीवाड़ा परत-दर-परत उजागर हो गया। उपजिलाधिकारी (न्यायिक) प्रियंका चौधरी ने मामले की सघन समीक्षा कर बीते 16 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी महोदय को अपनी स्पष्ट रिपोर्ट सौंपी। इस न्यायिक रिपोर्ट में साफ कहा गया कि कंप्यूटर खतौनी में दर्ज किए गए सभी दस्तावेज, फाइलें और आदेश पूरी तरह जाली और कूटरचित हैं।
एसडीएम न्यायिक की अकाट्य रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी महोदय ने तत्काल प्रभाव से कड़ा आदेश जारी किया था। डीएम ने आदेशित किया था कि 24 फरवरी 2026 तक हर हाल में विवादित जमीन से फर्जी नाम हटाकर पीड़ित राकेश कुमार का नाम दर्ज किया जाए, साथ ही फर्जीवाड़ा करने वाले दोषियों के विरुद्ध कठोरतम विधिक व दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लेकिन आज मई का महीना बीतने को है और पीड़ित जस का तस दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
राकेश कुमार आज भी सरकारी फाइलों का पुलिंदा हाथ में लेकर साहबों की गाड़ियों के पीछे दौड़ रहे हैं, जबकि फर्जी आदेश के दम पर जमीन हथियाने वाले रसूखदार बेखौफ घूम रहे हैं। अब देखना यह है कि इस खबर के उजागर होने के बाद शाहजहाँपुर का शीर्ष प्रशासन अपनी ही साख बचाने के लिए इस मामले में कब तक जागता है और पीड़ित को कब तक न्याय मिलता है।
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