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केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं ने खोले किसानों की समृद्धि के द्वार


 स्टेट ब्यूरो हेड योगेन्द्र सिंह यादव ✍🏻 

अन्नदाता किसानों की खुशहाली और समृद्धि किसी भी राष्ट्र या राज्य के विकास की नींव है। यदि किसान समृद्ध होंगे, तो देश विकास के पथ पर निरंतर अग्रसर रहेगा। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह जी ने कहा था कि “देश के विकास का रास्ता खेत–खलिहानों से होकर जाता है।”
इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए पिछले 11 वर्षों में केंद्र और प्रदेश सरकारों ने कृषि क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, जिन्होंने किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है।


कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार और योजनाओं का लाभ

पहले भूमि की उर्वरता एवं उपचार के लिए कोई वैज्ञानिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पहली बार पूरे देश में स्वायल हेल्थ कार्ड योजना शुरू की गई, जिसके माध्यम से मृदा परीक्षण कर किसानों को संतुलित खेती की दिशा में मार्गदर्शन मिला।

देशभर में किसानों के लिए अनेक योजनाएँ संचालित हैं—

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
  • वन नेशन–वन मार्केट (e-NAM)

अब किसान अपनी उपज को किसी भी मंडी में बिना अतिरिक्त कर चुकाए बेच सकते हैं। पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत देश के 12 करोड़ किसानों को प्रतिवर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता सुनिश्चित की गई है, जिससे किसानों की छोटी–छोटी जरूरतें बिना कर्ज लिए पूरी हो रही हैं।


सिंचाई व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार

पिछले 8 वर्षों में प्रदेश में 23 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई। कई वर्षों से लंबित परियोजनाओं—

  • अर्जुन सहायक परियोजना
  • बाणसागर परियोजना
  • सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना

—को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत पूरा कर किसानों को पानी की सुविधा उपलब्ध कराई गई।
प्रदेश सरकार द्वारा 16 लाख निजी नलकूपों के विद्युत बिल माफ किए गए, जिससे किसानों पर बड़ा आर्थिक बोझ कम हुआ।


क्रय केंद्रों के माध्यम से किसानों को मिला उचित मूल्य

किसानों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाने और एमएसपी का लाभ सीधे देने के लिए पूरे प्रदेश में व्यापक रूप से क्रय केंद्र स्थापित किए गए। सरकार ने स्पष्ट किया कि उपज का क्रय उसी किसान से होगा, जिसके नाम भूमि होगी, जिससे पारदर्शिता और किसान हित सुनिश्चित हुआ।


गन्ना किसानों के लिए बड़े परिवर्तन

प्रदेश सरकार ने 8 वर्षों में गन्ना मूल्य में ₹85 प्रति क्विंटल की वृद्धि की।
2017 से पहले प्रदेश में लगभग 108–110 चीनी मिलें थीं, जिनकी क्षमता कमजोर थी। सरकार के प्रयासों से—

  • 42 चीनी मिलों का क्षमता विस्तार
  • 4 नई चीनी मिलों की स्थापना
  • कोजेन प्लांट, डिस्टिलरी, एथेनॉल प्लांट की स्थापना

ने पूरे गन्ना उद्योग को नया आयाम दिया।

आज प्रदेश में गन्ने का क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है।
तकनीक के उपयोग से ऑनलाइन पर्ची प्रणाली लागू होने से माफियागीरी, घटतौली जैसी समस्याएँ समाप्त हो गईं।

केवल चीनी मिलों के माध्यम से ही प्रदेश में 10 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। इसके अलावा खाड़सारी उद्योग को रियायतें एवं निःशुल्क लाइसेंस प्रदान करके ग्रामीण उद्योगों को भी बढ़ावा दिया गया है।


किसानों की समृद्धि ही सरकार का लक्ष्य

चाहे चीनी मिल, डिस्टिलरी, एथेनॉल प्लांट हो या फाइन शुगर यूनिट—इन सभी से किसान को अधिक से अधिक लाभ और उपज का उचित मूल्य दिलाना प्रदेश सरकार का लक्ष्य है।
सरकार का संकल्प है कि किसान के चेहरे पर खुशहाली आए और उसकी मेहनत का पूरा सम्मान हो।



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