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| एआई द्वारा निर्मित प्रतीकात्मक दृश्य |
लखनऊ। काकोरी थाना क्षेत्र में नाटकीय ढंग से बरामद किए गए कथित गौमांस के मामले में अब चौंकाने वाली सच्चाई सामने आती दिख रही है। जो दिखाया गया, वह पूरी तरह सच नहीं था और जो सच था, उसे सामने आने से रोकने के लिए पुलिस कर्मियों को ही उलझा दिया गया—ऐसे गंभीर आरोप सूत्रों के हवाले से सामने आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, माननीय न्यायालय की मंशा “कोई निर्दोष जेल न जाए” के अनुरूप कार्य करते हुए काकोरी पुलिस बीते लगभग एक सप्ताह से मामले की गहन जांच कर रही थी। पुलिस जांच उस बिंदु तक पहुंच चुकी थी, जहां पूरे प्रकरण की वास्तविक सच्चाई उजागर होने वाली थी। इसी दौरान सिस्टम में ऊंची पहुंच रखने वाले लोगों के दबाव और साजिश के चलते काकोरी थाने के तीन पुलिसकर्मी खुद ही कार्रवाई की जद में आ गए।
बताया जा रहा है कि गौमांस तस्करी के इस मामले में फंसे आरोपी को बचाने और एक निर्दोष को जेल जाने से रोकने की कोशिश में काकोरी के दो दरोगा और एक सिपाही को निलंबित कर दिया गया, वहीं उनके खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर भी दर्ज कर दी गईं।
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे प्रकरण के पीछे एक सुनियोजित साजिश थी। आरोप है कि गौमांस तस्करी में नामजद आरोपी की पत्नी ने ही अपने पति को फंसाने के लिए यह पूरा खेल रचा। इससे पहले भी कुछ माह पूर्व पति को रास्ते से हटाने के इरादे से थार गाड़ी में गौमांस रखवाकर उसे जेल भिजवाया गया था। उस मामले में पति निर्दोष होने के बावजूद जेल जा चुका है।
इतना ही नहीं, अब दोबारा आरोपी की पत्नी ने अपने कथित प्रेमी और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर पति को फिर से गौमांस के मामले में फंसाने की साजिश रची। जांच के दौरान जब पुलिस इस सच्चाई तक पहुंचने लगी और एक निर्दोष युवक को बचाने की स्थिति बनी, तभी उल्टा पुलिसकर्मियों को ही फंसा दिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि
फिलहाल काकोरी गौमांस प्रकरण ने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सच्चाई सामने आएगी या फिर यह मामला भी दबाव और फाइलों के बीच दफन हो जाएगा—इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
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