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LDA के आगे बेबस काकोरी थाना पुलिस! पत्रकार से धक्का-मुक्की के बाद भी FIR नहीं — योगी सरकार के निर्देश सवालों के घेरे में

 

संवाददाता: राजन भारती

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर किए जा रहे बड़े दावों की सच्चाई राजधानी लखनऊ में ही सवालों के घेरे में आ गई है। काकोरी थाना पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं, जहां एक पत्रकार के साथ हुई धक्का-मुक्की के बावजूद अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

मामला सच की आवाज़ वेब न्यूज़ के प्रबंध संपादक शशांक मिश्रा से जुड़ा है। आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों की मर्यादा तोड़ते हुए खुलेआम पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की की। घटना के तुरंत बाद चैनल के प्रधान संपादक की ओर से काकोरी थाने में लिखित तहरीर दी गई, लेकिन पुलिस ने आज तक FIR दर्ज नहीं की।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि—
जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं यह निर्देश दे चुके हैं कि पत्रकारों के साथ मारपीट करने वालों को 24 घंटे के भीतर जेल भेजा जाएगा, तो फिर काकोरी थाना पुलिस किसके आदेश का इंतज़ार कर रही है?

क्या LDA के अधिकारी कानून से ऊपर हैं?
क्या पुलिस पर किसी तरह का दबाव या मिलीभगत है?
या फिर सरकार के सख्त निर्देश सिर्फ भाषणों तक ही सीमित रह गए हैं?

पत्रकारों पर हमले के मामलों में पुलिस की यह चुप्पी न सिर्फ एक पत्रकार के साथ अन्याय है, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सीधा आघात मानी जा रही है। जब सच दिखाने वाले पत्रकार को ही थाने से न्याय न मिले, तो आम नागरिक की सुरक्षा का भरोसा कैसे किया जाए?

इस पूरे प्रकरण ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि—
क्या उच्च अधिकारी काकोरी थाना पुलिस की जवाबदेही तय करेंगे,
या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा?

फिलहाल पीड़ित पत्रकार न्याय की आस लगाए दर-दर भटक रहा है, और काकोरी थाना पुलिस की खामोशी सवालों को और गहरा करती जा रही है।

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