ब्यूरो रिपोर्ट सुधीर सिंह कुम्भाणी सीतापुर ✍️
सीतापुर। सकरन थाना क्षेत्र के ग्राम रुद्रपुर में प्रधान प्रतिनिधि उपेन्द्र सिंह पर लगाए गए "किन्नर समाज के मंदिर पर कब्जा" और "नशीले पदार्थों की बिक्री" के आरोपों को ग्रामीणों ने पूरी तरह निराधार बताया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव के मध्य स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर वर्षों से उपेक्षित था। लगभग 17 वर्ष तक मंदिर में खंडित मूर्तियां पड़ी रहीं। ग्राम प्रधान ऊषा सिंह के कार्यकाल में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया, नई मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई तथा चबूतरा, रामायण शेड, कुएं की मरम्मत और एमएलसी निधि से हाईमास्ट लाइट की व्यवस्था कराई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर परिसर पर अवैध कब्जे और नशीले पदार्थों की बिक्री के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उनका दावा है कि गांव में किन्नर समाज का कोई परिवार निवास नहीं करता और मंदिर का निर्माण क्षत्रिय समाज के लोगों द्वारा कराया गया था।
मंदिर के समीप दुकान संचालित करने वाले जैनेंद्र सिंह ने भी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि मंदिर परिसर में किसी प्रकार के नशीले पदार्थों की बिक्री नहीं होती।
प्रधान प्रतिनिधि उपेन्द्र सिंह ने कहा कि भगवान शिव का मंदिर गांव की आस्था का केंद्र है और उन्होंने वहां कोई अवैध कब्जा नहीं किया है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में गांव में सड़क, नाली, चकमार्ग तथा धार्मिक स्थलों के विकास के लिए अनेक कार्य कराए गए हैं।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप असत्य पाए जाते हैं, तो झूठी शिकायत करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
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