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मिलावटी, खराब और एक्सपायरी खाद्य सामग्री पर सरकारी तंत्र की चुप्पी, जनता की सेहत से खुला खिलवाड़

 

विशेष संवाददाता | बाराबंकी

बाराबंकी जनपद में मिलावटी, खराब और एक्सपायरी डेट की खाद्य सामग्री की खुलेआम बिक्री पर रोक लगाने में जिम्मेदार विभाग पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है। हालात यह हैं कि खाद्य कारोबारियों की मनमानी पर कार्रवाई करने के बजाय सरकारी तंत्र ही उन्हें संरक्षण देता दिखाई दे रहा है। शिकायतों की जांच अब स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं, बल्कि वसूली का जरिया बनती जा रही है।

जनपद मुख्यालय ही नहीं, बल्कि हैदरगढ़ क्षेत्र में भी ऐसी कई दुकानें सामने आई हैं, जहां ब्रेड सहित नामचीन कंपनियों के खाद्य पदार्थों पर एक्सपायरी डेट साफ तौर पर दर्ज होने के बावजूद बिक्री की जा रही है। एक दुकान पर पत्रकार द्वारा बनाए गए वीडियो में यह स्थिति स्पष्ट देखी जा सकती है। हैरानी की बात यह रही कि दुकानदार ने गलती स्वीकारने के बजाय दबंगई दिखाते हुए ग्राहकों को धमकाया और यह तक कहा कि उसने “सब कुछ मैनेज” कर रखा है।

यह कोई एक मामला नहीं है। प्रतिबंधित, नकली और जहरीली खाद्य सामग्री जनपद में लंबे समय से बिक रही है, जिससे छोटे बच्चों से लेकर आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी न सिर्फ आंखें मूंदे बैठे हैं, बल्कि कथित तौर पर सुविधा शुल्क के लालच में अपने कर्तव्यों से भी विमुख नजर आ रहे हैं।

बीते 24 दिसंबर को आवास विकास कॉलोनी स्थित गुज्जू स्वीट्स पर स्थिति उस समय गंभीर हो गई, जब एक पत्रकार की तबीयत रस मलाई खाने के बाद बिगड़ गई। मौके पर मौजूद अन्य ग्राहकों ने मिठाई से दुर्गंध आने की शिकायत करते हुए उसे वापस किया। स्थानीय महिलाओं ने भी वहां अक्सर खराब मिठाई बिकने की बात कही। पत्रकार की हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया।

इस दौरान जब मामले की सूचना देने के लिए जिला खाद्य एवं औषधि विभाग के सहायक आयुक्त के सीयूजी नंबर पर संपर्क किया गया, तो फोन रिसीव नहीं हुआ। यह पहली बार नहीं है, जब आपात स्थिति में सीयूजी नंबर आम जनता के लिए बेकार साबित हुए हों। समाजसेवियों और नागरिकों का कहना है कि शिकायतें अब कार्रवाई की बजाय धन उगाही का साधन बनती जा रही हैं।

पीड़ित पत्रकार ने अंततः आईजीआरएस संदर्भ संख्या 40017625080483 के तहत शिकायत दर्ज कराई, लेकिन जांच की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई। आरोप है कि जांच अधिकारी ने न केवल धमकी भरे लहजे में बात की, बल्कि मामला फर्जी तरीके से निस्तारित कर दिया गया। यही स्थिति हैदरगढ़ और अन्य क्षेत्रों की शिकायतों में भी सामने आ रही है।

नतीजतन, जनपद में मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा सुरक्षित खाद्य व्यवस्था और जनस्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे प्रयासों पर यह स्थिति गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। आम नागरिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिकायत करने के लिए न पारदर्शी व्यवस्था है और न ही जिम्मेदार जवाबदेही, तो आखिर जनता अपनी सेहत की सुरक्षा के लिए किसके पास जाए।

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