शाहजहांपुर, 22 जनवरी।
जनपद शाहजहांपुर की समृद्ध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए तुलसी शोध संस्थान, स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज, आर्य महिला महाविद्यालय तथा वीरांगना अवंती बाई राजकीय महिला महाविद्यालय के मध्य आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू जनपद की मौखिक संत परंपरा, सांस्कृतिक आयोजनों और आध्यात्मिक धरोहर को शोध एवं प्रकाशन के माध्यम से सुरक्षित करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज के मीडिया प्रभारी डॉ. शिशिर शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि समझौता ज्ञापन पर तुलसी शोध संस्थान के निदेशक, स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से प्रो. आलोक मिश्रा एवं डॉ. श्रीकांत मिश्र, आर्य महिला महाविद्यालय की ओर से प्रो. रूपांशु माला तथा वीरांगना अवंती बाई राजकीय महिला महाविद्यालय की ओर से डॉ. कमलेश कुमार ने हस्ताक्षर किए।
इस एमओयू के अंतर्गत चारों संस्थान संयुक्त रूप से भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर को संरक्षित करने हेतु शोध, संगोष्ठी और प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य करेंगे। इस क्रम में 23 जनवरी से सात दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें गंगा स्नान मेले के दौरान आयोजित होने वाले संत सम्मेलनों पर गहन विमर्श और शोध किया जाएगा। इस शोध के निष्कर्षों को एक विशाल ग्रंथ के रूप में प्रकाशित करने का भी निर्णय लिया गया है।
तुलसी शोध संस्थान के प्रतिनिधि नीरज रस्तोगी ने कहा कि “संतों की वाणी केवल उपदेश नहीं, बल्कि समाज का जीवंत साहित्य है। इस एमओयू के माध्यम से गंगा स्नान मेले से जुड़ी संत परंपरा की मौखिक विरासत को लिखित रूप में संकलित किया जाएगा, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी इससे परिचित हो सकें।”
स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आर. के. आजाद ने इस समझौते को अकादमिक और शोध के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पहल शोधकर्ताओं के लिए नए आयाम खोलेगी। वहीं प्रो. आलोक मिश्रा ने इसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य बताते हुए कहा कि सात दिवसीय संत परंपरा को लिपिबद्ध करना न केवल शोध की दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में भी एक सुखद और सराहनीय प्रयास है।
आर्य महिला महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रूपांशु माला ने कहा कि यह प्रयास लुप्त होती मौखिक परंपराओं और संत साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगा। वहीं वीरांगना अवंती बाई राजकीय महिला महाविद्यालय की उपप्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार ने संत परंपरा में महिलाओं के योगदान और उनके सामाजिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समझौता ज्ञापन के अवसर पर मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती एवं सचिव प्रो. अवनीश कुमार मिश्र ने इस पहल को आशीर्वाद प्रदान किया। साथ ही प्रो. प्रभात शुक्ला, प्रो. मीना शर्मा, डॉ. विकास खुराना सहित अन्य शिक्षाविदों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए सभी संस्थानों को बधाई दी।
यह एमओयू न केवल शाहजहांपुर की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भारतीय संत परंपरा और लोक-सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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