लखनऊ।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने लखनऊ में वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य के बजट प्रबंधन, राजकोषीय स्थिति, पूंजीगत व्यय, डिजिटल वित्तीय सुधार, कोषागार व्यवस्था एवं पेंशन प्रणाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ₹50 करोड़ तक की परियोजनाओं की स्वीकृति संबंधित विभागीय मंत्री, ₹150 करोड़ तक की स्वीकृति वित्त मंत्री तथा इससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्तर से की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजनाएं 15 अप्रैल तक अनिवार्य रूप से स्वीकृत करा लें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी परियोजना की लागत में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होती है तो उसका पुनः अनुमोदन आवश्यक होगा। शासकीय भवनों में भी सड़क परियोजनाओं की तर्ज पर 5 वर्षों की अनुरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी एवं एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कर्मियों सहित अन्य अल्प-वेतनभोगी कर्मचारियों का मानदेय प्रत्येक माह निर्धारित तिथि पर राज्य स्तर से सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में यह जानकारी दी गई कि वर्ष 2023–24 में उत्तर प्रदेश का ₹1,10,555 करोड़ का पूंजीगत व्यय देश में सर्वाधिक रहा। कुल व्यय का 9.39 प्रतिशत निवेश पर खर्च कर राज्य ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2024–25 में राज्य की कुल देयताएं घटकर जीएसडीपी के 27 प्रतिशत तक आ गई हैं।
नीति आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश का कंपोजिट फिस्कल हेल्थ इंडेक्स वर्ष 2014 में 37 से बढ़कर 2023 में 45.9 हो गया है। वहीं, आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार राज्य का अपना कर राजस्व 11.6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरे स्थान पर है।
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