स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
लखनऊ, 09 नवम्बर 2025।
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी मिशन योजना शहरी नवीनीकरण और विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हो रही है। इस मिशन का उद्देश्य शहरों में बुनियादी ढाँचे का सुदृढ़ीकरण, नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना और तकनीकी साधनों के माध्यम से स्वच्छ, टिकाऊ तथा नागरिक सुविधाओं से युक्त वातावरण का निर्माण करना है।
मिशन के तहत चयनित शहरों में रेट्रोफिटिंग, पुनर्विकास और ग्रीनफील्ड विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसमें बुनियादी ढाँचे में सुधार, जीवन गुणवत्ता में वृद्धि, स्मार्ट समाधान लागू करना, आर्थिक विकास और समावेशी व टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना प्रमुख उद्देश्य हैं।
देश के कुल 100 स्मार्ट शहरों में उत्तर प्रदेश के 10 शहर — लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, अलीगढ़, बरेली, झांसी, सहारनपुर और मुरादाबाद — शामिल हैं। इन शहरों में ₹9330.92 करोड़ की लागत से कुल 678 कार्य स्वीकृत किए गए, जिनमें से 674 कार्य ₹9066.70 करोड़ की लागत से पूर्ण हो चुके हैं तथा 8 कार्य ₹264.22 करोड़ की लागत से प्रगति पर हैं।
स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को 6 मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है —
(1) ईज ऑफ लिविंग, (2) कल्चर व लाइफस्टाइल, (3) ई-गवर्नेंस व सिटी सर्विसेज, (4) वाटर, सेनीटेशन व हेल्थ, (5) ट्रांसफॉर्मिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर व यूटिलिटीज, तथा (6) न्यू एज ट्रांसपोर्ट व मोबिलिटी।
केंद्रांश ₹4900 करोड़ व राज्यांश ₹4900 करोड़ सहित कुल ₹9800 करोड़ की धनराशि जारी की गई है, जिसमें से ₹9495.64 करोड़ का व्यय किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य स्तर पर भी इस मॉडल को विस्तारित करते हुए अयोध्या, फिरोजाबाद, गोरखपुर, गाजियाबाद, मथुरा-वृन्दावन, मेरठ और शाहजहाँपुर को राज्य स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की पहल की है। राज्य योजना के अंतर्गत ₹270 करोड़ की लागत से आईटीएमएस (Integrated Traffic Management System) परियोजना लागू की जा चुकी है, जिसके माध्यम से ई-चालान व्यवस्था संचालित की जा रही है।
राज्य स्मार्ट सिटी योजना के तहत ₹1318.33 करोड़ की लागत से 109 कार्य स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 45 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। इसके अंतर्गत स्मार्ट पार्किंग, स्मार्ट मार्ग, डिजिटल लाइब्रेरी, सीनियर केयर सेंटर, ओपन जिम, कन्वेंशन सेंटर, वर्किंग वीमेन हॉस्टल, सीसीटीवी इंटीग्रेशन, फूड प्लाज़ा आदि जैसी आधुनिक परियोजनाएँ शामिल हैं।
वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए योजना में ₹400 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
प्रदेश के 16 शहरों में ₹2300 करोड़ की लागत से ICCC और ITMS परियोजनाएँ क्रियाशील हैं, जहाँ ICCC (Integrated Command and Control Centre) को “ब्रेन ऑफ सिटी” के रूप में कार्यरत किया गया है।
सभी 17 स्मार्ट शहरों को तकनीकी रूप से जोड़ते हुए Smart City State Central Digital Monitoring Centre की स्थापना भी पूर्ण हो चुकी है।
स्मार्ट सिटी रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के आगरा और वाराणसी लगातार देश के शीर्ष 10 शहरों में, जबकि आगरा, वाराणसी और कानपुर शीर्ष 20 में शामिल रहे हैं।
इंडिया स्मार्ट सिटीज अवार्ड कॉन्टेस्ट-2022 में उत्तर प्रदेश को State/UT Awards श्रेणी में राजस्थान के साथ संयुक्त तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। विभिन्न श्रेणियों में राज्य को कुल 10 राष्ट्रीय पुरस्कार मिले, जिनमें —
नई दिल्ली में आयोजित 9वीं स्मार्ट सिटी एक्सपो में कानपुर को Best Heritage & Historic Architecture Award प्रदान किया गया।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में भी उत्तर प्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया — लखनऊ देश में तीसरे, आगरा 10वें, गाजियाबाद 11वें, प्रयागराज 12वें, कानपुर 13वें, वाराणसी 17वें, मेरठ 23वें और अलीगढ़ 26वें स्थान पर रहे।
इसी प्रकार गोरखपुर, मुरादाबाद, मथुरा-वृन्दावन, फिरोजाबाद, सहारनपुर, झांसी, बरेली और अयोध्या ने 3–10 लाख जनसंख्या श्रेणी में स्थान प्राप्त किया।
इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश स्मार्ट, स्वच्छ और सशक्त शहरों के निर्माण की दिशा में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है।
लखनऊ
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