संवाददाता: लखनऊ
लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्मारकों के निर्माण के नाम पर हुए करीब 1400 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले की जांच ने 11 साल बाद रफ्तार पकड़ ली है। वर्ष 2014 में दर्ज विजिलेंस एफआईआर के आधार पर चल रही जांच में अब ठोस कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद उनके खिलाफ सीधी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जांच में सामने आया है कि स्मारकों के निर्माण में नियमों और मानकों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में कमी और भुगतान के दौरान गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप जांच के दायरे में हैं।
बताया जा रहा है कि लंबे समय तक फाइलें ठंडे बस्ते में रहने के बाद अब जांच एजेंसियां पुराने दस्तावेजों की दोबारा गहन समीक्षा कर रही हैं। इसी क्रम में संबंधित अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा सकती है, जिससे घोटाले में संलिप्त रहे अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय मानी जा रही हैं।
गौरतलब है कि यह घोटाला अपने समय में प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा में रहा था। अब वर्षों बाद जांच में आई तेजी से एक बार फिर मामले ने तूल पकड़ लिया है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
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शाहजहांपुर
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