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सकरन में मनरेगा बनी खाऊ-कमाऊ योजना, शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार मौन

 

ब्यूरो रिपोर्ट: सुधीर सिंह कुम्भाणी

सकरन (सीतापुर)।
जनपद सीतापुर में जिलाधिकारी एवं डीसी मनरेगा की सख्ती के बावजूद सकरन विकास खंड में मनरेगा योजना को खुलेआम पलीता लगाया जा रहा है। आरोप है कि जिम्मेदार एपीओ की मौन स्वीकृति से करीब दर्जन भर ग्राम पंचायतों में बिना कोई वास्तविक कार्य कराए, केवल कागजों पर ही फर्जी एनएमएमएस (NMMS) के माध्यम से मजदूरी दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार चिल्हिया, गठिया कला, झउवा कला, जालिमपुर, लखुवा बेहड़, सेमरा कला, पखनियापुर, रेवान, कौवाखेरा, बेलवा बसहिया और भैंसहा सहित कई ग्राम पंचायतें इस फर्जीवाड़े का केंद्र बनी हुई हैं। इन गांवों में कार्यस्थलों पर मजदूरों की वास्तविक मौजूदगी नहीं होती, लेकिन फोटो अपलोड कर उपस्थिति दर्ज कर ली जाती है।

नाम न छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि एपीओ द्वारा कथित रूप से तय ठेकेदारों के माध्यम से काम कराया जाता है। मजदूरों से सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए कहा जाता है, जिसके बदले उन्हें समोसा, शराब और प्रति व्यक्ति लगभग 20 रुपये दिए जाते हैं। इसी प्रक्रिया के सहारे मनरेगा के नाम पर भुगतान निकाला जा रहा है।

आरोप यह भी है कि कई रोजगार सेवकों ने इस फर्जीवाड़े का विरोध किया, लेकिन इसके बावजूद उन पर एपीओ द्वारा जबरन कार्य दिखाने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सकरन विकास खंड की सभी संदिग्ध ग्राम पंचायतों में निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि मनरेगा योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद मजदूरों तक पहुंच सके।

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