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पुस्तकालय बंद होने से छात्रों का भविष्य संकट में, पुनरुद्धार की उठी मांग

 

ब्यूरो रिपोर्ट संवाददाता बाराबंकी ✍️

बाराबंकी। जनपद में बंद पड़े सरकारी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों को पुनः संचालित करने की मांग को लेकर सोमवार को ‘पुस्तकालय पुनरुद्धार समिति’ के बैनर तले छात्रों और युवाओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। समिति के अध्यक्ष अम्बरीष कुमार के नेतृत्व में पहुंचे छात्रों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पुस्तकालयों की बदहाली पर नाराजगी जताई।

छात्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम-2006 लागू होने के बावजूद अधिकांश पुस्तकालय संसाधनों के अभाव में बंद पड़े हैं। इससे खासतौर पर ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के उन छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जो महंगी प्राइवेट लाइब्रेरी का खर्च नहीं उठा सकते। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।

समिति ने मांग की है कि सभी बंद पड़े जिला एवं राजकीय पुस्तकालयों को तत्काल खोला जाए, रिक्त पदों पर लाइब्रेरियन और सहायक की नियुक्ति की जाए, पुरानी पुस्तकों के स्थान पर नई एवं उपयोगी किताबें उपलब्ध कराई जाएं तथा पुस्तकालयों को डिजिटल सुविधाओं से लैस किया जाए।

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्र उग्र आंदोलन और अनशन के लिए बाध्य होंगे।

इस दौरान अम्बरीष राव, विकास गौतम, आकाश दीप, भानु प्रताप, सुरेश चांद गौतम सहित बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।

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