शाहजहाँपुर। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गन्ना क्षेत्र में प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों और तकनीक आधारित पारदर्शी कार्यप्रणाली के चलते एक कड़ा सुशासन विलेख स्थापित हुआ है। जनपद शाहजहाँपुर में गन्ना विकास एवं गन्ना मूल्य भुगतान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कलेक्टिव प्रगति दर्ज की गई है। सरकार के कड़े कमान एजेंडे के कारण गन्ना किसानों को उनकी उपज का मूल्य समयबद्ध और सिस्टेमैटिक तरीके से सीधे खातों में प्राप्त हो रहा है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया और मजबूत कलेक्टिव बूस्ट दिया है।
वर्तमान में जनपद शाहजहाँपुर में गन्ने की फसल का कुल आच्छादन लगभग 1,03,000 हेक्टेयर विशाल क्षेत्रफल में फैला हुआ है। गन्ना विकास विभाग द्वारा क्षेत्र की रोजा, निगोही, पुवायाँ एवं तिलहर गन्ना विकास परिषदों के माध्यम से विभिन्न कड़े कमान कार्यक्रमों का कलेक्टिव क्रियान्वयन किया जा रहा है। वहीं, सहकारी गन्ना विकास समिति रोजा व पुवायाँ तथा चीनी मिल समिति तिलहर द्वारा लगभग 1.96 लाख गन्ना आपूर्तिकर्ता कृषक सदस्यों के गन्ना विपणन एवं कृषि निवेश की उपलब्धता को पूरी कड़ाई से सुनिश्चित कराया जा रहा है।
• 💰 कुल देय गन्ना मूल्य: चालू पेराई सत्र 2025-26 में जनपद की चीनी मिलों पर कुल ₹1029.11 करोड़ रुपये का कलेक्टिव गन्ना मूल्य देय हुआ था।
• ⚡ कड़ा कलेक्टिव भुगतान: देय राशि के सापेक्ष अब तक ₹923.60 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किसानों को ससमय किया जा चुका है, जो कुल देय का 89.75 प्रतिशत है।
• 💯 शत-प्रतिशत विलेख मिलें: जनपद की प्रमुख चीनी मिलों—निगोही, रोजा, तिलहर एवं पुवायाँ द्वारा कृषकों के पाई-पाई का यानी शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य का कलेक्टिव भुगतान कर प्रतिबद्धता दोहराई गई है।
| 🏭 चीनी मिल कमान क्षेत्र (कुल 5) | 🎯 सक्रिय गन्ना विकास परिषदें व समितियां | 📈 कुल कलेक्टिव कृषक सदस्य |
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• सहकारी क्षेत्र: तिलहर व पुवायाँ • निजी क्षेत्र: निगोही, रोजा व मकसूदापुर |
• रोजा, निगोही, पुवायाँ एवं तिलहर परिषदें • सहकारी गन्ना विकास समिति रोजा, पुवायाँ व चीनी मिल समिति तिलहर |
लगभग 1.96 लाख (आपूर्तिकर्ता किसान) |
गन्ना किसानों को समयबद्ध भुगतान उपलब्ध कराने के साथ-साथ कमान विभाग द्वारा आधुनिक कृषि तकनीकों को कड़ाई से बढ़ावा दिया जा रहा है। खेतों में उन्नतशील प्रजातियों के प्रचार-प्रसार, समय पर कृषि निवेश की कलेक्टिव उपलब्धता तथा विभिन्न कड़े विकास कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने हेतु कड़ा प्रोत्साहन मिल रहा है। इस तकनीक-आधारित विलेख से गन्ने की उत्पादकता बढ़ने के साथ ही किसानों की प्रति हेक्टेयर आय में भी कलेक्टिव और निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
"किसान हितैषी नीतियां, पारदर्शी प्रशासनिक कमान और समयबद्ध भुगतान प्रणाली ही हमारी कार्यप्रणाली का मूल विलेख है। चीनी मिलों और विभाग के समन्वित व कलेक्टिव प्रयासों से किसानों के हितों का संरक्षण हर स्तर पर कड़ाई से सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों और ग्रामीण बाजारों को एक नया बल मिला है।"
'सच की आवाज' वेब न्यूज के माध्यम से हमारे कमान कलेक्टिव स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव ने इस कृषि विलेख की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि शाहजहाँपुर जनपद में गन्ना मूल्य भुगतान की यह कड़क रफ्तार यह सिद्ध करती है कि यदि प्रशासनिक व्यवस्थाएं पारदर्शी और नीतियां नीयत साफ रखकर लागू की जाएं, तो अन्नदाताओं के जीवन में कलेक्टिव व सकारात्मक बदलाव लाना पूरी तरह संभव है।
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