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संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत कृषि विभाग ने किसानों को किया जागरूक, चूहों के नियंत्रण के बताए प्रभावी उपाय

 

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहाँपुर। जनपद में 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक संचालित संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं 11 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चलने वाले दस्तक अभियान के तहत कृषि विभाग ने किसानों एवं आमजन से चूहों और छछूंदरों के प्रभावी नियंत्रण की अपील की है। विभाग ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस (JE), एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) तथा स्क्रब टाइफस जैसे संचारी रोगों की रोकथाम के लिए चूहों पर नियंत्रण बेहद आवश्यक है।

कृषि विभाग के अनुसार चूहे एवं छछूंदर कई गंभीर बीमारियों के वाहक होते हैं। उनके शरीर पर मौजूद परजीवी मनुष्यों तक संक्रमण पहुंचा सकते हैं। एक अनुमान के अनुसार लगभग 40 प्रतिशत स्क्रब टाइफस संक्रमण चूहों से जुड़े कारणों से फैलता है।

विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि अनाज का सुरक्षित भंडारण करें, खेतों और घरों के आसपास साफ-सफाई रखें, झाड़ियों एवं चूहों के बिलों को नष्ट करें तथा प्राकृतिक शत्रुओं जैसे बिल्ली, उल्लू, सांप आदि का संरक्षण करें। आवश्यकता पड़ने पर वैज्ञानिक तरीके से चूहेदानी एवं स्वीकृत रसायनों का प्रयोग कर चूहों का नियंत्रण किया जाए।

कृषि विभाग ने छह दिवसीय चूहा नियंत्रण योजना अपनाने की भी सलाह दी है, जिसमें चूहों के बिलों की पहचान, बिना जहर वाला चारा, उसके बाद जिंक फॉस्फाइड युक्त चारा एवं मृत चूहों का सुरक्षित निस्तारण शामिल है।

विभाग ने चेतावनी दी कि रसायनों का प्रयोग करते समय दस्ताने पहनें, दवाओं को बच्चों की पहुंच से दूर रखें तथा मृत चूहों को बिना हाथ लगाए गड्ढे में दबा दें या सुरक्षित तरीके से नष्ट करें।

प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि स्क्रब टाइफस और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियां चूहों के माध्यम से फैलती हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर पर दाने, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

कृषि विभाग ने किसानों एवं आमजन से अपील की है कि घरों और आसपास स्वच्छता बनाए रखें, जलभराव न होने दें, शौचालय का प्रयोग करें तथा तुलसी, नीम, लेमन ग्रास, सिट्रोनेला और गेंदा जैसे मच्छररोधी पौधे लगाकर संचारी रोगों की रोकथाम में सहयोग करें।

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