ब्यूरो रिपोर्ट सुधीर सिंह कुम्भाणी सीतापुर ✍️
सकरन (सीतापुर)। विकास खंड सकरन में मनरेगा कार्यों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पंचायत रतनापुर में बिना स्वीकृति और बिना एस्टीमेट के मनरेगा निधि से लाखों रुपये की लागत से नाला निर्माण कराए जाने का आरोप सामने आया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए इस निर्माण कार्य को "श्रमदान" घोषित किए जाने की मांग जिलाधिकारी से की है।
बताया जा रहा है कि करीब दो माह पूर्व ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव द्वारा अमित के घर से गांव के बाहर तक सड़क किनारे नाला निर्माण का कार्य कराया गया। आरोप है कि निर्माण कार्य एक ठेकेदार के माध्यम से कराया गया और मनरेगा मजदूरों के बजाय जेसीबी मशीन से रातोंरात खुदाई कराई गई। इसके बाद मानकविहीन सामग्री और ईंटों का प्रयोग कर नाले का निर्माण पूरा कर दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के लिए न तो प्रस्ताव पारित किया गया, न ही तकनीकी एस्टीमेट तैयार हुआ और न ही मजदूरों की मस्टर रोल (एमआर) फीड की गई। इसके बावजूद भुगतान कराने की प्रक्रिया ब्लॉक अधिकारियों की मिलीभगत से की जा रही है।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रामशंकर सिंह ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा बिना स्वीकृति निर्मित नाले को श्रमदान घोषित करने की मांग की है।
वहीं, खंड विकास अधिकारी श्रीश कुमार गुप्ता ने कहा कि "नाला विवादित था, इसलिए बिना एस्टीमेट के निर्माण कराया गया।" दूसरी ओर एपीओ विकास श्रीवास्तव ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने कहा कि शिकायत की जांच कर आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कदम उठाए जाते हैं।


