सीतापुर। सामुदायिक कुत्तों के अधिकार और रेबीज़ नियंत्रण को लेकर 17 अगस्त को सीतापुर के पशुप्रेमियों ने उच्चतम न्यायालय के आदेश के विरोध में शांतिपूर्ण मार्च निकाला। यह मार्च आंख अस्पताल लालबाग मार्ग पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और पशुप्रेमी शामिल हुए।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग पीठों के आदेशों में विरोधाभास सामने आया है। एक ओर न्यायालय ने कुत्तों को संवैधानिक संरक्षण दिया था, वहीं 11 अगस्त को अन्य पीठ ने दिल्ली नगर निगम को 5000 कुत्तों को शेल्टर में भेजने का आदेश दिया। देशभर से विरोध के बाद माननीय CJI बी.आर. गवैई ने आदेश की समीक्षा का आश्वासन दिया और माना कि यदि ABC नियम 2023 को सही ढंग से लागू किया गया होता तो यह स्थिति नहीं आती।
मुख्य तथ्य और समस्याएँ:
संभावित समाधान:
✔ सामूहिक नसबंदी और टीकाकरण अभियान
✔ विदेशी नस्लों की ब्रीडिंग पर रोक
✔ सामुदायिक कुत्तों को अपनाना और उन्हें दुश्मन न मानना
✔ जागरूकता और शिक्षा कार्यक्रम
✔ वैक्सीन व इम्यूनोग्लोबुलिन की सुनिश्चित उपलब्धता
अगर कुत्ते हटाए गए तो खतरे:
✔ Vacuum Effect से काटने की घटनाएँ बढ़ेंगी
✔ बुबोनिक प्लेग का खतरा
✔ चूहों, बंदरों व सियारों की संख्या असंतुलित होगी
✔ शेल्टर में कुत्ते तनावग्रस्त और आक्रामक होंगे
✔ सरकार पर ₹15,000 करोड़ का आर्थिक बोझ
कुत्तों ने कई बार निभाई जीवनरक्षक भूमिका:
फेथ फाउंडेशन के संस्थापक ऋषभ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देश में पशु क्रूरता को बढ़ावा देगा। नीतियाँ संवैधानिक अधिकारों और वैज्ञानिक समाधान के आधार पर बननी चाहिए।
अमित गौर, गौ सेवा ट्रस्ट का कहना है कि रेबीज़ का कोई इलाज नहीं है, लेकिन जागरूकता और टीकाकरण से इसे रोका जा सकता है। प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि हर सरकारी अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध हो और कोल्ड चैन सुरक्षित रखी जाए।
इस मौके पर मनोज वैश्य, अमित गौड़, भावना सक्सेना, दीपांशी मिश्रा, कोविद, अभव्या चौहान, आस्था, गौरव, यश, अमांशु, निधि, रंजना समेत कई लोग मौजूद रहे।
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