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| AI द्वारा निर्मित प्रतीकात्मक चित्र — भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ उठती जनआवाज़ का दृश्य |
ब्यूरो रिपोर्ट: सुधीर सिंह कुम्भाणी | सीतापुर
सकरन (सीतापुर)। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बावजूद विकास खंड सकरन में धान खरीद व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र के कई धान क्रय केंद्रों पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप सामने आए हैं। भारतीय किसान यूनियन जनमंच के जिलाध्यक्ष रामशंकर सिंह ने आरोप लगाया है कि सांडा, अरुवा नसीरपुर, महराजनगर, अदवारी, बोहरा पलोली हब और दुगाना स्थित क्रय केंद्रों पर केंद्र प्रभारियों व सचिवों ने मिलीभगत कर खुलेआम धांधली की है।
आरोप है कि पात्र किसानों को महीनों तक तौल के लिए भटकाया गया, जबकि फर्जी किसान आईडी और अपात्र लोगों के नाम पर सैकड़ों टन धान की खरीद कागजों में दिखाकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। किसानों का कहना है कि बिचौलियों और दलालों का धान प्राथमिकता पर खरीदा गया, वहीं छोटे और गरीब किसान मजबूरन व्यापारियों को कम दामों पर धान बेचने को विवश हुए।
अदवारी स्थित क्रय केंद्र पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे किसानों के नाम पर धान खरीदा गया जिनके पास खेती योग्य भूमि तक नहीं है। कई मामलों में पते अधूरे या कोडवर्ड के रूप में दर्ज पाए गए, फिर भी करोड़ों रुपये का भुगतान खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। दुगाना और बोहरा पलोली हब में भी किसानों की पहचान छिपाकर बड़े पैमाने पर धान खरीद दिखाने के आरोप लगे हैं।
जब इस संबंध में केंद्र प्रभारियों और सचिवों से सवाल किए गए तो उन्होंने खतौनी और लेखपाल सत्यापन का हवाला दिया, लेकिन किसानों के पते और पहचान में हेरफेर पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
भाकियू पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। किसानों की मांग है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब और पात्र किसानों को उनका हक मिल सके।
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