बेसिक शिक्षा मंत्री के आश्वासन से शिक्षामित्रों में जगी नई उम्मीद

 

ब्यूरो चीफ तशरीफ़ अली | मेरठ

मेरठ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह द्वारा 6 जनवरी 2026 को लखनऊ में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह में दिए गए आश्वासन के बाद प्रदेश भर के लाखों शिक्षामित्रों में खुशी और उम्मीद की लहर दौड़ गई है। मंत्री के सकारात्मक वक्तव्य को लेकर शिक्षामित्रों में यह भरोसा जगा है कि वर्षों से लंबित उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

प्रदेश में शिक्षामित्र बीते लगभग 22 वर्षों से परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। गांव-गांव और गली-गली शिक्षा की अलख जगाने में शिक्षामित्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद आज भी उन्हें शिक्षक के समान कार्य करने के बाद भी अस्थायी अथवा संविदा कर्मी का दर्जा ही प्राप्त है।

शिक्षामित्रों का कहना है कि कार्य, योग्यता, अनुभव और जिम्मेदारियों के बावजूद उन्हें न तो स्थायी सेवा का लाभ मिल पा रहा है और न ही सम्मानजनक मानदेय। वर्तमान में लगभग 10 हजार रुपये मासिक मानदेय, वह भी केवल 11 महीने, उनके और उनके परिवारों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए अपर्याप्त है। आर्थिक तंगी के कारण कई बार उन्हें कर्ज लेने की स्थिति का सामना करना पड़ता है, लेकिन सीमित आय के कारण उन्हें कर्ज भी सहजता से उपलब्ध नहीं हो पाता।

शिक्षामित्रों ने यह भी कहा कि जब उनके अपने बच्चों के भविष्य को संवारने का समय आता है, तब वे स्वयं को असहाय महसूस करते हैं। यही स्थिति उनके लिए सबसे बड़ा मानसिक कष्ट बन चुकी है।

उल्लेखनीय है कि शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शिक्षामित्रों के हितों पर विचार करने की बात कही थी। वहीं अब बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के हालिया आश्वासन से शिक्षामित्रों को नई उम्मीद मिली है। हालांकि, पूर्व के अनुभवों के चलते उनमें कुछ आशंकाएं भी बनी हुई हैं।

लखनऊ में आयोजित सम्मान समारोह के माध्यम से शिक्षामित्रों ने सरकार को यह संदेश दिया है कि वे एकजुट हैं और पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। शिक्षामित्रों की मांग है कि सरकार समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण को लेकर ठोस निर्णय ले, ताकि प्रदेश के लाखों शिक्षामित्र सम्मानजनक जीवन जी सकें और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बना सकें।

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