स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️
शाहजहाँपुर: 17 फरवरी, 2026
उत्तर प्रदेश आज ‘ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी’ के रोल मॉडल के रूप में स्थापित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार प्रदेश को फार्मा सेक्टर में अग्रणी मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रदेश न केवल देश का सबसे बड़ा कंज्यूमर मार्केट है, बल्कि फार्मा सेक्टर के लिए जरूरी विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल वर्कफोर्स भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। राज्य सरकार अपने निवेशकों को ‘ट्रिपल एस’ — ‘सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड’ — की गारंटी देती है, जो औद्योगिक विकास के लिए अनिवार्य है।
फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र में संभावनाओं को देखते हुए विभिन्न जनपदों में क्लस्टर आधारित विकास किया जा रहा है। ललितपुर में प्रदेश के पहले फार्मा पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका है, जबकि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट 350 एकड़ में मेडिकल डिवाइस पार्क का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। इस पार्क से अब तक 100 से अधिक फार्मा कंपनियां जुड़ चुकी हैं। निवेशकों की सुविधा के लिए यू.एस.एफ.डी.ए. टेस्टिंग लैब भी स्थापित की जा रही है।
ललितपुर के फार्मा पार्क को हब एंड स्पोक मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें आर.एंड.डी. की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। लखनऊ में वर्ल्ड क्लास फार्मा इंस्टीट्यूट के निर्माण की दिशा में काम चल रहा है, जबकि गौतमबुद्धनगर, बरेली और पूर्वी उत्तर प्रदेश में नए फार्मा पार्कों की योजना बनाई जा रही है। नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आई.आई.टी. कानपुर के सहयोग से 1,200 करोड़ रुपये की लागत से ‘मेड-टेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित किया जा रहा है। लखनऊ पहले से ही सी.डी.आर.आई. और एन.बी.आर.आई. जैसी राष्ट्रीय स्तर की केंद्रीय प्रयोगशालाओं का केंद्र है।
नीतिगत मोर्चे पर प्रदेश पॉलिसी पैरालिसिस से बाहर निकल चुका है। वर्तमान में 34 सेक्टोरियल पॉलिसी प्रभावी हैं, जो निवेशकों को स्पष्टता और सुरक्षा प्रदान करती हैं। सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश प्रक्रिया सरल और समयबद्ध बनाई गई है। फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस नीति के तहत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में छूट और निर्यात प्रोत्साहन की व्यवस्था है। एफ.डी.आई. और फॉर्च्यून-500 पॉलिसी वैश्विक निवेश को आमंत्रित करती हैं।
विशेष बात यह है कि उत्तर प्रदेश का विकास औद्योगिक होने के साथ-साथ संतुलित और पर्यावरण के अनुकूल भी है। पिछले 9 वर्षों में भौतिक विकास के साथ फॉरेस्ट कवर में भी वृद्धि हुई है। बेहतर कनेक्टिविटी और जवाबदेह प्रशासन के दम पर उत्तर प्रदेश आज फार्मा निवेश का पसंदीदा गंतव्य बन चुका है। केंद्र की दूरदर्शी नीतियों और राज्य सरकार के जमीनी प्रयासों के समन्वय से प्रदेश फार्मा और बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की नेतृत्व क्षमता को नई दिशा दे रहा है।
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