लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन की पारदर्शी चिकित्सा नीति, कलेक्ट्रेट नागरिक स्वास्थ्य सुरक्षा चार्टर तथा प्रदेश के शीर्ष चिकित्सा संस्थान किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के सुशासनात्मक विज़न के विपरीत एक अत्यंत गंभीर व संवेदनहीन विसंगति का मामला उजागर हुआ है। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में कैंसर से पीड़ित अत्यंत गरीब मरीजों के लिए संचालित 'असाध्य रोग योजना' के अंतर्गत मिलने वाली अत्यंत महंगी जीवन रक्षक दवाओं व इंजेक्शनों में बड़े घोटाले की पुष्टि के बाद चिकित्सा प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। दवा वितरण पटल पर तैनात समूचे डिफाल्टर कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाकर विभागाध्यक्ष (HOD) कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही, जांच प्रभावित न हो, इसके लिए सभी आरोपियों को 'शहर न छोड़ने' के कड़े नोडल निर्देश जारी किए गए हैं।
प्राप्त प्रामाणिक ग्राउंड जीरो प्रविष्टि के अनुसार, असाध्य योजना के तहत पंजीकृत गरीब कैंसर मरीजों का संपूर्ण इलाज मुफ्त विलेखों के आधार पर किया जाता है। किंतु, विभागीय सिंडिकेट द्वारा मृत अथवा डिस्चार्ज हो चुके मरीजों के नाम पर भी महंगी दवाओं की फर्जी खपत दिखाकर सरकारी धन का खुला दुरुपयोग किया गया। इस वित्तीय विसंगति का भंडाफोड़ बजट के आंकड़ों के मिलान से हुआ। जहाँ अक्टूबर-नवंबर माह में दवाओं की मासिक खपत लगभग ₹१० लाख दर्ज थी, वहीं फरवरी माह में यह विसंगतिपूर्ण ढंग से अचानक उछलकर करीब ₹४० लाख प्रविष्टि पर पहुँच गई।
| 📊 घोटाला स्वरूप एवं वित्तीय विलेख प्रविष्टि | ⚙️ प्रशासनिक दंडात्मक कमान एवं रिकवरी क्लॉज |
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• संस्थान प्रभाग: यूरोलॉजी विभाग, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ। • अनुमानित घपला सांख्यिकी: शुरुआती नोडल जांच के आधार पर लगभग ₹२ करोड़ की दवाओं का घपला पुष्ट। • लक्षित योजना: शासकीय 'असाध्य रोग सहायता योजना' (कैंसर रोधी विंग)। |
• तात्कालिक दंडात्मक एक्शन: वितरण पटल के सभी कर्मियों का स्थानांतरण व होड (HOD) कार्यालय संबद्धता। • कस्टडी विलेख रोस्टर: जांच पूरी होने तक किसी भी आरोपी कर्मचारी को लखनऊ जनपद छोड़ने पर पूर्ण विधिक रोक। • अग्रिम विधिक क्लॉज: उच्च स्तरीय जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट सोमवार (आज) आने के बाद सीधे कस्टडी FIR व सरकारी धन की रिकवरी। |
इस संवेदनशील प्रकरण पर कलेक्ट्रेट सुशासन मानकों के अनुरूप केजीएमयू प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है। केजीएमयू के आधिकारिक प्रवक्ता **डॉ. केके सिंह** ने 'सच की आवाज वेब न्यूज' को विशेष वार्ता में बताया कि इस पूरे मामले की जांच हेतु गठित उच्च स्तरीय जांच कमेटी अपनी विस्तृत विलेख रिपोर्ट सोमवार (आज) को कुलपति पटल पर सौंपेगी। शुरुआती डिजिटल व भौतिक साक्ष्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी के संकेत मिले हैं। जांच कमेटी की रिपोर्ट में जिन भी अधिकारियों, फार्मासिस्टों या बाह्य कर्मचारियों की डिफाल्टर संलिप्तता पुष्ट होगी, उनके विरुद्ध न केवल निलंबन विलेख जारी होगा, बल्कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराकर जेल कस्टडी सुनिश्चित कराई जाएगी।
"केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में असाध्य रोग योजना के बजट में ₹१० लाख से ₹४० लाख का विसंगतिपूर्ण उछाल सीधे तौर पर एक बड़े सिंडिकेट कृत्य की ओर इशारा करता है। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय और कलेक्ट्रेट सतर्कता विंग इस रिपोर्ट पर बारीक कमान सर्विलांस बनाए हुए है। किसी भी दोषी को शासकीय संरक्षण नहीं मिलेगा। आज सोमवार को रिपोर्ट प्राप्त होते ही विधिक कस्टडी धाराओं के तहत दंडात्मक रोस्टर लागू किया जाएगा। सरकारी खजाने को क्षति पहुँचाने वाले डिफाल्टरों की चल-अचल संपत्तियों से एक-एक पैसे की रिकवरी (Recovery) कराई जाएगी।" — चिकित्सा शिक्षा एवं सुशासन विभाग कमान बुलेटिन, उत्तर प्रदेश
लखनऊ मुख्य चिकित्सा संभाग, केजीएमयू चौक परिसर, वजीरगंज व ठाकुरगंज संपर्क मार्ग ग्रिड, चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय पटल, कलेक्ट्रेट जनसुनवाई मंचों और माननीय उच्च न्यायालय व जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के सम्मानित प्रबुद्ध अधिवक्ताओं, विभिन्न संभ्रांत रोगी कल्याण परिषदों, जन-स्वास्थ्य अधिकार यूनियनों तथा सजग नागरिक सुरक्षा समितियों ने 'सच की आवाज वेब न्यूज' के माध्यम से पीड़ितों के हक के इस कड़वे सच को पूरी निडरता व प्रामाणिकता के साथ उजागर करने की भूरि-भूरि सराहना की है। 'सच की आवाज' इस ₹२ करोड़ के महाघोटाले के दोषियों को सजा मिलने और रिकवरी होने तक इस मुद्दे पर सतत कमान सर्विलांस बनाए रखेगा। कलेक्ट्रेट उपभोक्ता संरक्षण एवं जन-स्वास्थ्य समन्वय सेल ने पुनः समस्त जागरूक नागरिकों व तीमारदारों से वैधानिक व विनम्र अपील की है कि वे सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले मुफ्त इलाज व दवाओं के विलेखीय पर्चों का मिलान स्वयं भी करते रहें। यदि आपके वार्ड, राजकीय चिकित्सालय या अंचल के भीतर दवाओं की बाहर से खरीद का दबाव, मुफ्त बजट का गबन, या स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जनसुनवाई बयानों की अमर्यादित अवहेलना परिलक्षित हो, तो मूकदर्शक न रहें; तत्काल इसकी प्रामाणिक डिजिटल सूचना कुलपति कार्यालय पटल, चिकित्सा शिक्षा मंत्री शिकायत प्रकोष्ठ या मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल **'१०७६'** पर प्रेषित करें। आपकी समयबद्ध सजगता ही सुशासित लखनऊ के सुरक्षित व पारदर्शी स्वास्थ्य तंत्र की अभेद्य ढाल है।
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