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तेल पर वैश्विक वर्चस्व की लड़ाई में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर देना होगा विशेष ध्यान: कुलपति

 

स्टेट ब्यूरो हेड योगेंद्र सिंह यादव उत्तर प्रदेश ✍️

शाहजहाँपुर। स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा "तेल पर राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई और भारत" विषय पर एक विचारोत्तेजक अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वैश्विक ऊर्जा राजनीति, बदलते भू-राजनीतिक समीकरण, भारत की ऊर्जा सुरक्षा तथा विदेश नीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने कहा कि आज तेल केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामरिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि विश्व की महाशक्तियाँ ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय में भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और संतुलित विदेश नीति पर विशेष ध्यान देना होगा।

मुख्य अतिथि प्रो. डी.आर. यादव (राजनीति विज्ञान विभाग, गायत्री विद्यापीठ पीजी कॉलेज, रिसिया, बहराइच) ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेल को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा बदल दी है। भारत ने अपनी संतुलित एवं स्वतंत्र विदेश नीति के माध्यम से राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने का सफल प्रयास किया है, जो उसकी परिपक्व कूटनीति का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि हरित प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार और ऊर्जा आत्मनिर्भरता भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक राजनीति और भारत की विदेश नीति से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछकर विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।

इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. आदित्य कुमार सिंह, कु. सीतू शुक्ला, कु. व्याख्या सक्सेना सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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